Al-Risala · January 2026 · page 55

सादा ज़िन्दगी

الرسالہ، جنوری ۲۰۲۶، صفحہ ۵۵

बट का घोड़ा भी शामिल था, पर जब दौड़ हुई तो एक मिस्त्री (ग़ैर-मुस्लिम) का घोड़ा आगे बढ़ गया। मिस्त्री ने विजय के जोश में कोई ऐसा वाक्य कहा जो गवर्नर के बेटे (मोहम्मद बिन अम्र बिन आस) को बुरा मालूम हुआ और उसने उस मिस्त्री को कोड़े से मार दिया। कोड़ा मारते हुए उसने कहा, "यह लो, और मैं शरीफ़ों की औलाद हूं। हज़रत अनस बिन मालिक इस घटना को बयान करते हुए कहते हैं कि मिस्त्री (ग़ैर-मुस्लिम) मिस्र से चलकर मदीना पहुंचा और ख़लीफ़ा उमर फ़ारूक़ से शिकायत की कि गवर्नर के लड़के ने इस तरह उसको कोड़े से मारा। हज़रत उमर ने कहा, "तुम यहां ठहरो" और तुरन्त अपने एक ख़ास आदमी को मिस्र भेजा कि अम्र बिन आस और उनके बेटे मोहम्मद बिन अम्र जिस हाल में हों उनको लेकर मदीना आओ। लिहाज़ा वे लोग लाए गए। जब वे मदीना पहुंचे तो हज़रत उमर ने कहा, "मिस्त्री कहां है? ये कोड़ा लो और इस शरीफ़ ज़ादे को मारो।"

इसके बाद मिस्त्री ने कोड़ा लिया और मिस्र के गवर्नर के सामने उसके बेटे को मारना शुरू किया। वह मारता रहा, यहां तक कि उसको ज़ख़्मी कर दिया। हज़रत उमर बीच-बीच में कहते जाते थे कि "शरीफ़ ज़ादे को मारो" जब वह मार चुका तो हज़रत उमर फ़ारूक़ ने कहा, "इनके पिता अम्र बिन आस के सिर पर भी मारो, क्योंकि ख़ुदा की क़सम इनके बेटे ने सिर्फ़ अपने बाप की बड़ाई के ज़ोर पर तुमको मारा था।"

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