सादा ज़िन्दगी
الرسالہ، جنوری ۲۰۲۶، صفحہ ۵۶
खुदा के अलावा किसी आर न पैदा किया हा। इसका मतलब यह ह कि हर आदमी के अन्दर वही फ़ितरत है जो किसी दूसरे के अन्दर है। हर आदमी के अन्दर अच्छे और बुरे की वही तमीज़ मौजूद है जो किसी दूसरे के अन्दर पाई जाती है। इसके साथ ही हर इंसान के अंदर एक अहंकार भी छिपा होता है। यही अहंकार सारी परेशानियों की जड़ बनता है। लेकिन अल्लाह की एक खास रहमत यह है कि उसने हर इंसान के अहंकार को शुरुआत से ही दिल के अंदर सुला कर रखा है—वह जागा हुआ नहीं होता। समझदारी इसी में है कि हम उस अहंकार को सोया रहने दें, उसे कभी जगने न दें। जब इंसान का अहंकार सोया रहता है, तब वह अपनी असली, सीधी-सादी और नेचुरत हालत में होता है। उस समय वह वही करता है जो असली इंसानियत की मांग है। इंसान तभी बुरा बनता है जब उसका अहंकार जगा दिया जाए। इंसान की समझदारी इसी में है कि वह किसी दूसरे के अहं को जगाने से पूरी तरह बचे। और अगर कभी किसी का अहंकार भड़क भी जाए, तो समझदारी से तुरंत उस आग को ठंडा कर दे। जो लोग अक्लमन्दी के इस तरीके को इख़्तियार कर लें, उनको कभी दूसरों की तरफ़ से शिकायत न होगी, चाहे वे एक मुल्क में रहते हों या दूसरे मुल्क में।
‹ Previous page Next page › Contents of January 2026 All issues