सादा ज़िन्दगी
الرسالہ، جنوری ۲۰۲۶، صفحہ ۵۸
नौजवान से कहा कि मौलाना अब चुप है और अपनी ग़लती मान रह है तो तुम क्यों उनके ख़िलाफ़ इतना ज़्यादा चीख रहे हो? उन्होंने मौलाना इकरामुद्दीन साहब से कहा कि आप घबराएं नहीं, यह आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। आख़िरकार हिन्दू नौजवान चुप हो गया। मौलाना इकरामुद्दीन साहब अपनी जगह पर बराबर खड़े रहे। कुछ देर के बाद नौजवान ने बेरुखी के साथ मौलाना इकरामुद्दीन साहब से पूछा, “आप कहां से आ रहे है?” उन्होंने बताया कि खड़क बाज़ार से। नौजवान ने कहा कि खड़क बाज़ार में एक मौलाना इकरामुद्दीन हैं। क्या आप उनको जानते हैं। वह बहुत अच्छे आदमी हैं। मेरी मां उनके पास गई थी और उनसे तावीज़ लाई थी। उस तावीज़ से बहुत फ़ायदा हुआ। मैं उनसे मिलना चाहता हूं। मौलाना इकरामुद्दीन साहब ने मुसकराते हुए कहा कि अभी तो वह सफ़र में है। कल तक वह वहां पहुंच जाएंगे, उस वक़्त उनसे मुलाकात हो सकती है। हिन्दू नौजवान ने पूछा कि आपको कैसे मालूम कि वह सफ़र में हैं। उन्होंने जवाब दिया कि जिस मुसाफिर से तुम बात कर रहे हो वही मौलाना इकरामुद्दीन है। यह सुनते ही हिन्दू नौजवान ने मौलाना इकरामुद्दीन के पांव पकड़ लिए। उसने कहा कि मुझे क्षमा कर दीजिए। मुझसे बहुत भारी ग़लती हो गई। इस ग़लती पर जी चाहता है कि मैं अपने आपको मारूं। वह नौजवान अपनी
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