सादा ज़िन्दगी
الرسالہ، جنوری ۲۰۲۶، صفحہ ۶۰
She belives that women reacted to war in a completely different way from men. The men were more matter-of-fact and casual about the experience, whereas the women reacted in an overwhelmingly emotional manner. मौजूदा ज़माने में औरतों की प्रकृति और उनकी पैदाइशी योग्यता के बारे में बहुत सी तहक़ीक़ात की गई हैं। औरत की सिन्फ़ (लिंग) को शुद्ध साइन्टिफिक लिहाज़ से समझने की कोशिश की गई है। इन शोध के ज़रिए जो बातें मालूम हुई हैं वे हैरतअंगेज़ तौर पर औरत के बारे में इस्लाम के नज़रिए की पुष्टि करती हैं। नई खोजों ने बताया है कि औरत पैदाइशी तौर पर अति संवेदनशील है। वह मर्द के मुक़ाबले में जज़्बाती और भावुक (emotional) होती है। यह खोज साफ़ तौर पर बताती है कि औरत को ज़िन्दगी के ऐसे क्षेत्रों में दाखिल करना दुरुस्त नहीं जहां ठंडे ज़ेहन के तहत फैसला करने की ज़रूरत हो, जहाँ परिस्थितियों से प्रभावित हुए बिना राय बनानी पड़ती है, और जहाँ जज़्बात के बजाय यथारवादी फैसले की ज़रूरत होती है। औरत और मर्द में पैदा होने के वक़्त से से ही कुछ फ़र्क़ होते हैं। इसी वजह से इस्लाम में दोनों के काम और जिम्मेदारियाँ अलग-अलग रखी गई हैं। यह कोई दर्जे या बराबरी का मसला नहीं, बस काम के बँटवारे की बात है। असल में तो यह फर्क वही है जो साइंस भी बताती है। सच तो यह है कि इस मामले में कुछ लोग जो “महिला आज़ादी” का नारा लगाते हैं, उनका तरीका ही साइंस के ख़िलाफ़ है—इस्लाम के नहीं।
‹ Previous page Next page › Contents of January 2026 All issues