सादा ज़िन्दगी
الرسالہ، جنوری ۲۰۲۶، صفحہ ۶۲
बनाने के लिए अपन आपका न पान पर राज़ी करना पड़ता है। अपना बात को दूसरे की नज़र में क़ाबिले- कुबूल (स्वीकार्य) बनाने के लिए अपने आपको दूसरे के मुक़ाम पर खड़ा करना पड़ता है। अपने और दूसरे के बीच सुनने और सुनाने की माहौल बनाने की ख़ातिर एकतरफ़ा तौर पर उन तमाम झगड़ों को ख़त्म कर देना पड़ता है जो दोनों के बीच की सामान्य फ़िज़ा को नष्ट किए हुए हों। इल्म का सदक़ा सबसे बड़ी कुर्बानी की कीमत पर दिया जाता है। यह देना उस वक़्त मुमकिन होता है जबकि आदमी ख़ुद को पीछे करने पर तैयार हो जाए। इस दुनिया में देने वाला बनने के लिए खोने वाला बनना पड़ता है। चूंकि लोग खोने वाला बनने के लिए तैयार नहीं होते, इसलिए वे देने वाले भी नहीं बनते। अल्लाह के यहाँ घमंड की माफ़ी नहीं सुफ़ियान सौरी (रह०) ने कहा: "जो गुनाह मन की इच्छा से मजबूर होकर होता है, उसकी माफ़ी की उम्मीद रहती है। लेकिन जो गुनाह घमंड से होता है, उसकी माफ़ी की उम्मीद नहीं। क्योंकि इब्लीस का गुनाह घमंड से था और आदम की ग़लती इच्छा से थी। आदम को तौबा के बाद माफ़ कर दिया गया, लेकिन इब्लीस हमेशा के लिए
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