सादा ज़िन्दगी
الرسالہ، جنوری ۲۰۲۶، صفحہ ۶۳
म थे मगर उन्होंने अपने निकाह में कोई धूम-धाम नहीं की। यहाँ तक कि रसूलुल्लाह को और अपने करीबी साथियों को भी शादी में नहीं बुलाया। सादा तौर पर महज ईजाबो-कुबूल के जरिए निकाह कर लिया। और तयशुदा महर अदा करके दाम्पत्य जीवन गुजारने लगे। इल्म का सदक़ा रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फरमाया कि सबसे अच्छा सदक़ा (दान) है कि मुसलमान एक इल्म सीखे, फिर उसको अपने भाइयों को सिखाए। (सुनन इब्न माजा, हदीस संख्या 243)
सदक़ा क्या है? सदक़ा दरअसल उस खैरख्वाही का नाम है, जो एक भाई की तरफ से अपने दूसरे भाई के लिए जाहिर होती है। इस खैरख्वाही का इजहार कभी माल की सूरत में होता है कभी एक अच्छी नसीहत की सूरत में और कभी किसी दूसरी सूरत में खैरख्वाही इन्सान के सीने में जारी होने वाला रब्बानी चश्मा है और इल्म का सदक़ा इस रब्बानी सरचश्मे का बाहर निकलना है। इल्म (सच्चाई की पहचान) बेशक इस कायनात (सृष्टि) की सबसे बड़ी चीज़ है। और यही वजह है कि इल्म सबसे बड़ा सदक़ा (दान) है। आसमान के नीचे जो कुछ भी होता है, उनमें सबसे अद्भुत यह है कि इंसान किसी दूसरे के हित
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